Skip to content
सीखें

नमाज़ कैसे पढ़ें

एक रकअत, तरतीब से, और हर हालत में क्या पढ़ा जाता है

  1. चरण 1

    क़िबले की तरफ़ खड़े होकर तकबीर कहें

    اللهُ أَكْبَرُ

    कैसे पढ़ें

    Allahu akbar

    मतलब

    अल्लाह सबसे बड़ा है।

    दोनों हाथ कानों तक उठाएँ, फिर बाँध लें।

  2. चरण 2

    सना पढ़ें

    سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ

    कैसे पढ़ें

    Subhanaka Allahumma wa bihamdika, wa tabarakasmuka, wa ta‘ala jadduka, wa la ilaha ghayruk.

    मतलब

    ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है, और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।

  3. चरण 3

    सूरह फ़ातिहा पढ़ें, फिर कोई और सूरह

    फ़र्ज़ नमाज़ की पहली दो रकअतों में, और सुन्नत व नफ़्ल की हर रकअत में दूसरी सूरह पढ़ी जाती है।

  4. चरण 4

    रुकू में जाएँ और तीन बार कहें

    سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ

    कैसे पढ़ें

    Subhana Rabbiyal ‘azeem

    मतलब

    पाक है मेरा रब, जो बहुत बड़ा है।

  5. चरण 5

    फिर सीधे खड़े हो जाएँ

    سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ ، رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ

    कैसे पढ़ें

    Sami‘ Allahu liman hamidah — Rabbana lakal hamd

    मतलब

    अल्लाह ने सुन ली उसकी जिसने उसकी तारीफ़ की। ऐ हमारे रब! सारी तारीफ़ तेरे ही लिए है।

  6. चरण 6

    सजदे में जाएँ और तीन बार कहें

    سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى

    कैसे पढ़ें

    Subhana Rabbiyal a‘la

    मतलब

    पाक है मेरा रब, जो सबसे बुलंद है।

    थोड़ी देर बैठें, फिर इसी तरह दूसरा सजदा करें।

  7. चरण 7

    क़ादे में तशह्हुद पढ़ें

    التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللهِ وَبَرَكَاتُهُ ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللهِ الصَّالِحِينَ ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ

    कैसे पढ़ें

    At-tahiyyatu lillahi was-salawatu wat-tayyibat. As-salamu ‘alayka ayyuhan-nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuh. As-salamu ‘alayna wa ‘ala ‘ibadillahis-salihin. Ash-hadu an la ilaha illallahu wa ash-hadu anna Muhammadan ‘abduhu wa rasuluh.

    मतलब

    तमाम ज़बानी, बदनी और माली इबादतें अल्लाह ही के लिए हैं। ऐ नबी! आप पर सलाम हो, और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें। हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलाम हो। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं।

  8. चरण 8

    फिर दरूद शरीफ़ पढ़ें

    اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

    कैसे पढ़ें

    Allahumma salli ‘ala Muhammadin wa ‘ala ali Muhammadin kama sallayta ‘ala Ibrahima wa ‘ala ali Ibrahima innaka Hamidum Majid. Allahumma barik ‘ala Muhammadin wa ‘ala ali Muhammadin kama barakta ‘ala Ibrahima wa ‘ala ali Ibrahima innaka Hamidum Majid.

    मतलब

    ऐ अल्लाह! मुहम्मद ﷺ पर और मुहम्मद ﷺ की आल पर रहमत भेज, जैसे तूने इब्राहीम (अ.) पर और इब्राहीम (अ.) की आल पर रहमत भेजी। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह! मुहम्मद ﷺ पर और मुहम्मद ﷺ की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम (अ.) पर और इब्राहीम (अ.) की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमाई। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बुज़ुर्गी वाला है।

    हर नमाज़ के आख़िरी क़ादे में तशह्हुद के फ़ौरन बाद पढ़ें। तीन और चार रकअत वाली नमाज़ों में पहले क़ादे में सिर्फ़ तशह्हुद पढ़कर अगली रकअत के लिए खड़े हो जाएँ।

  9. चरण 9

    सलाम से पहले एक छोटी दुआ पढ़ें

    رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

    कैसे पढ़ें

    Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina ‘adhaban-nar.

    मतलब

    ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।

    यहाँ क़ुरआन या सुन्नत की कोई भी दुआ पढ़ी जा सकती है। यह सबसे ज़्यादा सिखाई जाने वाली दुआ है।

  10. चरण 10

    दोनों तरफ़ सलाम फेरकर नमाज़ पूरी करें

    السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللهِ

    कैसे पढ़ें

    As-salamu ‘alaykum wa rahmatullah

    मतलब

    आप पर सलामती हो और अल्लाह की रहमत।

    फ़र्ज़ रकअतें: फ़ज्र 2, ज़ुहर 4, अस्र 4, मग़रिब 3, इशा 4। तीन और चार रकअत वाली नमाज़ों में पहले क़ादे के बाद फिर खड़े हों।

इस मस्जिद के लोगों के लिए तैयार किया गया। जहाँ तरीक़े में फ़र्क़ हो, अपने मौलाना साहब की बताई बात पर अमल करें।